जब कर्बला में पानी था तो उलेमा ने क्यों लिखा कि तीन दिन पानी बंद रहा? (जब मैदान-ए कर्बला में पानी मौजूद था तो आला हज़रत रहमतुल्लाहि अलैह, हज़रत अल्लामा जलालुद्दीन, अल्लामा हसन रज़ा और अल्लामा नईमुद्दीन मुरादाबादी रहिमहुमुल्लाह ने क्यों लिखा कि तीन दिन पानी बंद रहा?) क़ारिईने किराम! हमने कर्बला में पानी मौजूद होने के बारे में अपनी किताब "वाक़िआत-ए कर्बला की तहक़ीक़ व तर्दीद" में तफ़्सीली कलाम किया है और कुतुब-ए-मुअतबरा से दलीलें पेश की हैं। वह तहरीर व्हाट्सऐप के ज़रिये आप तक भी पहुँची। बहुत से उलेमा-ए किराम ने उसे पसंद फ़रमाया, हमारी हौसला-अफ़ज़ाई की और दुआओं से नवाज़ा। लेकिन इस तफ़्सीली बहस के बाद भी कुछ लोगों के ज़ेहन में एक सवाल पैदा हुआ कि जब पानी मौजूद था तो हमारे अकाबिर ने तीन दिन पानी बंद रहने की रिवायत क्यों बयान की? इसी सवाल का जवाब पेश है। فنقول وبالله التوفيق इमामे अहले सुन्नत इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ बरेलवी रहमतुल्लाहि अलैह, अल्लामा हसन रज़ा ख़ाँ रहमतुल्लाहि अलैह, मुफ़्ती नईमुद्दीन मुरादाबादी रहमतुल्लाहि अलैह और अल्लामा मुफ़्ती जलालुद्दीन अमजदी रहमतुल्लाहि अलैह ने अपनी ...
आशूरा के दिन की तहक़ीक़ علامہ دانش حنفی (आशूरा के दिन अर्श, लौह, क़लम बनाए गए? आशूरा के दिन की फ़ज़ीलत के बारे में वारिद रिवायतों की तहक़ीक़) आशूरा के दिन की फ़ज़ीलत के बारे में जो सहीह रिवायतें वारिद हुई हैं, हम उन पर कोई कलाम नहीं करेंगे। ज़ाहिर सी बात है कि उन पर कलाम करना भी नहीं बनता। हम उन रिवायतों का ज़िक्र करेंगे जिन पर हमारे मुहद्दिसीन ने कलाम किया है और उन्हें मौज़ू (गढ़ी हुई) क़रार दिया है। क्योंकि बहुत सी रिवायतें शियाओं के रद्द में गढ़ी गईं और बहुत सी शियाओं ने ख़ुद गढ़ीं। एक रिवायत में बयान किया जाता है कि हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की तौबा इसी दिन क़बूल हुई, हज़रत आदम की मुलाक़ात हज़रत हव्वा से इसी दिन हुई, हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम मछली के पेट से इसी दिन बाहर आए, हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती इसी दिन ठहरी, हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम के लिए फ़िदया इसी दिन आया, इसी दिन हज़रत आदम अलैहिस्सलाम पैदा हुए, इसी दिन जन्नत में दाख़िल हुए, आशूरा के दिन ही अर्श, कुर्सी, आसमान, ज़मीन, सूरज, चाँद, सितारे और जन्नत को पैदा किया गया, आशूरा के दिन ही हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को आसमान पर उठा...