माहे रमजान मुबारक कि आमद करीब है और इस माह मे हर नेकी का सवाब डबल हो जाता है मुसलमान इसी माह मे अपने माल कि जकात निकालते है जकात इस्लाम का एक रुकन भी है कामयाब वही लोग होते है जो अपने माल की जकात अदा करते है अल्लाह पाक फरमाता! और वोह जो जकात देने का काम करने वाले है (कूर्आन पाक ) इस आयत मे कामयाबी पाने वाले अहल इमान कि निशानी यह बताइ है के वोह जकात निकालने वाले है! जकात के फजाइल हदिस मे है जिस ने अपने माल की जकात अदा कर दि तो बेशक उस के माल का खतरा टल गया और फरमाया के जकात दे कर अपने मालो को मजबूत किलो मे कर लो और फरमाया के अपने माल की जकात निकाल के वोह पाक करने वाली है तुझे पाक कर देगी बुखारी शररिफ मे है अल्लाह पाक ने माल दिया और वोह उस कि जकात न निकाले तो कयामत के दिन माल गंजे सांप कि सूरत मे कर दिया जाएगा वोह सांप उस के गले मे तोक (हार ) बना कर डाला जाएगा फिर उसे अजाब होगा (सही बुखारी ) जकात निकलने से माल कम नही होता बल्कि और बढता रहता है अल्लाह पाक फरमाता है!...