[ताज़िये के सामने फ़ातेहा] दारुल इफ्ता गुलज़ारे तैय्यबा - 06:27 सवाल: जो इमाम ताज़िये के सामने फ़ातेहा पढ़ता हो उसके पीछे नमाज़ पढ़ने का हुक्म क्या है? अलजवाब वबिल्लाहित्तौफ़ीक़: सूरत-ए-मसऊला में ताज़िये के सामने फ़ातेहा पढ़ना दुरुस्त तरीका नहीं बल्कि जहालत व ग़लत रिवाज में शुमार होता है। आला हज़रत, इमामे अहले सुन्नत, मुजद्दिदे दीनो मिल्लत, इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ क़ादरी रहमतुल्लाहि अलैह फ़रमाते हैं: "फ़ातेहा जायज़ है जिस चीज़ पर हो, मगर ताज़िये पर रखकर या उसके सामने होना जहालत है। ताज़िये से जुदा, ख़ालिस सच्ची नियत से हज़राते शुहदाए किराम की नियाज़ हो।" (फ़तावा रज़विया, जिल्द 24, सफ़्हा 499) फ़रमाते हैं उलमाए किराम इस मसअला ज़ैल में कि अगर किसी शख़्स ने ताज़िया बनाने की मन्नत मानी तो क्या वह अपनी मन्नत पूरे करे या अगर उस मन्नत की जगह सदक़ा वग़ैरह करना चाहे तो क्या यह सदक़ा करना दुरुस्त होगा? तफ़सील के साथ जवाब इनायत फ़रमाएँ। मुरव्वजा ताज़िया बनाने की मन्नत मानना जायज़ नहीं है। यह शरई नज़्र नहीं है इसलिए पूरा करना ज़रूरी नहीं है। सदक़ा देना भी ज़रूरी नहीं है। अलबत्ता नज़्र व मन्न...