الجواب وباللہ توفیق صورت مسئولہ میں محرم کو تمباکو جس میں خوشبو ہو کھانا مکروہ ہے مگر اس سے دم لازم نہیں آتا مفتی امجد علی اعظمی علیہ الرحمہ فرماتے ہیں ) خوشبو بالوں ،یا() بدن ،یا() کپڑوں میں لگانا۔ جایز نہیں
خالص خوشبو مشک، عنبر، زعفران، جاوتری، لونگ، الائچی، دار چینی، زنجبیل وغیرہ کھانا۔ (بہار شریعت حصہ ششم) بہار شریعت اس عبارت سے معلوم ہوا کہ کھانے میں وہ چیز منع ہے جس میں خوشبو غالب ہو تو دم لازم اے گا لیکن مسالہ ماوا میں باغبان کی تمباکو ملاتے ہیں جس کی خوشبو مغلوب ہے' لہٰذا دم لازم نہیں آتا مگر کرات پھر بھی ہے' ہو سکے تو بچنے کی کوشش کریں واللہ اعلم بالصواب کتبہ ابو احمد ایم جے اکبری دارالافتاء گلزار طیبہ
: अलजवाब वबिल्लाहि तौफ़ीक़: सूरत-ए-मस्ऊला में एहराम की हालत में ऐसे तम्बाकू या मावा का इस्तेमाल जिसमें खुशबू मिली हुई हो
मकरूह है
लेकिन उससे दम लाज़िम नहीं आता। फ़क़ीहे मिल्लत सद्रुश्शरीअह हज़रत मुफ़्ती अमजद अली आज़मी अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं: "खुशबू को बालों
बदन या कपड़ों में लगाना जायज़ नहीं। इसी तरह ख़ालिस खुशबू जैसे मुश्क
अंबर
ज़ाफ़रान
जावित्री
लौंग
इलायची
दालचीनी
ज़ंजबील वगैरह खाना भी जायज़ नहीं।" (बहारे शरीअत
हिस्सा शश्ठ) इस इबारत से मालूम हुआ कि एहराम की हालत में वह चीज़ खाना ममनूअ है जिसमें खुशबू ग़ालिब हो। अगर कोई मुहरिम ऐसी चीज़ खाए जिसमें खुशबू ग़ालिब हो तो उस पर जज़ा (दम) वाजिब हो सकता है। लेकिन मौजूदा मसअले में जो मावा या तम्बाकू इस्तेमाल किया जाता है
उसमें बाग़बान वगैरह की जो खुशबू मिलाई जाती है वह अस्ल तम्बाकू के मुक़ाबले में बहुत कम होती है
यानी खुशबू मग़लूब होती है
ग़ालिब नहीं होती। फ़ुक़हा-ए-किराम ने लिखा है कि अगर खुशबू किसी खाने या पीने की चीज़ में मग़लूब हो तो दम वाजिब नहीं होता। चुनाँचे "नहरुल फ़ाइक़" में है: "अगर खुशबू किसी ऐसी चीज़ में मिलाई गई जो बिना पकाए खाई जाती है
तो अगर खुशबू मग़लूब हो तो कोई जज़ा लाज़िम नहीं
अलबत्ता अगर उसकी बू महसूस होती हो तो कराहत है।" इसलिए मावा या तम्बाकू में मिली हुई हल्की खुशबू की वजह से दम वाजिब नहीं होगा
क्योंकि खुशबू मग़लूब है। हाँ
एहराम की हालत में इसका इस्तेमाल कराहत से खाली नहीं
इसलिए मुहरिम को चाहिए कि जहाँ तक हो सके इससे बचे
ताकि एहराम की पाकीज़गी और अदब पूरी तरह बरक़रार रहे। वल्लाहु तआला आ'लमु बिस्सवाब कतबहू: अबू अहमद एम. जे. अकबरी दारुल इफ्ता गुलज़ारे तैय्यबा
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